रविवार, 29 जुलाई 2012

प्राथमिक शाला भवन निर्माण का कार्य अपूर्ण है


 विकासखंड के कई विद्यालय आज भी भवन विहिन

सरंगढ़।
शिक्षा की बेहतरी के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद भी शिक्षा  मं गुणात्मक परिवर्तन कर पाने में नाकाम है। जिसके कारण से सारंगढ़ विकासखंड के कई विद्यालय आज भी भवन विहिन व मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।  ग्राम पंचायत पिण्डरी दुखुपाट में प्राथमिक शाला भवन निर्माण का कार्य अपूर्ण है। भवन के अभाव में बच्चे तालाब और खाई के बीच बने मंगल भवन में पढ़ाई करने के लिये मजबुर है। बरसात के निदो में दूखुपाट का रास्ता किचड़ में तब्दील हो जाता है। मंगल भवन के मार्ग में अनगीनत खाई नुमा घुरवा बना है जिसमें पानी भरा है छोटे-छोटे बच्चों को इन मार्गाें से प्रतिदिन आना जाना पड़ता है।
 स्कूल के शिक्षक शशीभुशण सिंह उर्फ गौतम लहरे ने बताया कि हमें हरपल बच्चों पर नजर रखना पड़ता है, स्कूल आते समय पालक पहुचाने आते है छूटटी होने पर हम रास्ता पार कराते है। हर समय डर बना रहता है कि कोई बच्चा बाहर न चला जाये। ग्राम पंचायत पिण्डरी के सरपंच पति षषीचंद महेष ने कहा कि स्कूल भवन षिघ्र वनाया जाय उन्होंने दुखूपाट में सी.सी. सड़क निर्माण कराने की बात कही। विदित हो कि पिण्डरी दुखुपाट में प्राथमिक षाला भवन के लिये 3.10 लाख रुपये की लागत से इसके लिए भवन निर्माण कार्य कराये जाने की स्वीकृति जिला षिक्षा विभाग ने दी थी। उक्त स्थान पर निर्माण कार्य आरंभ तो हुआ परंतु लंबे समय बाद भी कार्य पूर्ण नहीं हो सका। बताया गया कि राशि के अभाव में इसके निर्माण कार्य को बीच में रोक दिया गया। इधर स्कूल के प्रधान पाठक ने कहा कि राशि के अभाव में निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। जैसे ही द्वितिय किस्त मिलेगा कार्य प्रारंभ हो जायेगा।


सरंगढ़। 29 जुलाई 2012
ग्राम पंचायत बड़े हरदी में सर्व षिक्षा अभियान के तहत हाई स्कूल का निर्माण करने की योजना लटक गई है। जबकि सरकार द्वारा इसके लिये 28.19 लाख की राशि भी दी गई है। चिरप्रतीक्षित इस महत्वपूर्ण हाई स्कूल निर्माण में देर होने से क्षेत्र के लोगों में असंतोष बढ़ने लगा है। इस योजना के लिए पिछले एक साल से जमीन तलाशने का काम किया जा रहा है। पटवारी रिकार्ड देखने के बावजूद ये काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान प्रस्तावित स्थल पर निव खुदाई का कार्य होने के बाद कुछ विकास विरोधी लोगों ने इस भूमि को छोटे झाड़ का जंगल बता कर कोर्ट से निर्माण रूकवाने के लिये स्टे लगवा दिया है जिससे निर्माण कार्य रूक गया है स्कूल भवन नही होने से छात्र-छात्राओं को भारी परेषानियों के बिच षिक्षा ग्रहण करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत के द्वारा अन्य स्थल पर निर्माण करने के लिए जगह की तलाश नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार हाई स्कूल निर्माण के लिए एक दो स्थानों को चुना गया था। इन स्थानों पर जमीन के विवादित होने की जानकारी मिलने पर निमा्रण एजेंसी को पीछे हटना पड़ा। इधर बड़े हरदी के नागरिकों का कहना है कि षिक्षा विभाग चाहे तो साई पारा की जमीन पर हाई स्कूल का निर्माण कर सकता है। लेकिन आज तक इसका कार्य प्रारंभ नहीं होने को लोगों ने विभागीय उदासीनता का परिचायक बताया है।

मंगल भवन निर्माण में अनियमितताए


मंगल भवन की गुणवत्ता में अनदेखी 


सारंगढ़।
विकास खण्ड सारंगढ़ के ग्रामीड़ क्षेत्रों में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यो की गुणवत्ता में कमी व राशि आहरण कर काम नही कराने जैसी अनियमितताए क्षेत्र के सरपंच - सचिव करने लगे है। ग्राम पंचायत बड़े हरदी के आश्रित गा्रम महकमपुर में अनुमानित 6 लाख की लागत से बनाए जा रहे मंगल भवन की गुणवत्ता में अनदेखी की गई है।
दिवाल में घटिया दर्जे की ईटों का उपयोग किया गया है, जो बरसात के पानी में घुलने लगे है।

खिड़की दरवाजे की हालत जर्जर हो गई है। इसके अलावा निर्माण कार्य लम्बे समय से रूके होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंगल भवन सात साल बीतने के बाद भी अधूरा है। यदि यह भवन निर्माण पूरा हो जाए तो लोगों को कई कामों के लिए सुविधा हो जाएगी। स्थानीय निवासी मंगल महेष, अजित कमार हरिप्रिय ने बताया कि इस काम में ग्राम पंचायत द्वारा घोर लापरवाही बरती गई है। एक सरपंच का पूरा कार्यकाल समाप्त हो गया दूसरे सरपंच को तीन साल हो गये पर काम नही हुआ। गांव के प्रेरक जगनाथ ने बताया कि इसके लिये कई बार षिकायत किया गया है ग्राम सुराज अभियान में भी मामले को उठाया गया पर आज तक कोई कायवाई नही हुई, मंगल भवन बनने से पहले ही जर्जर हो गई है, लगता है कि अब यह नही बन पायेगा। सुत्रों से पता चला है कि जनपद पंचायत के द्वारा इसके निर्माण चालू कराने के लिये ग्राम पंचायत को पिछले दिनों चेक प्रदान किया गया था लकिन उक्त चेक को सरपंच ने गिरवी रख दिया है जिस कारण राशि आहरण नही हो पाया है। और काम जस का तस।



शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे विद्यार्थी


सारंगढ़। 

शिक्षा सत्र प्रारंभ हो चूका है। हर साल की तरह इस बार भी पालकों की जेब हल्की हो गई है। स्कूल फीस, बस्ते, किताबों और कॉपियों के दाम बढ़ गए हैं। अधिकांश स्कूलों में शैक्षणिक शुल्क में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही किताबें व यूनिफॉर्म भी निश्चित दुकान से खरीदने की शर्त भी पालकों के सामने है। इस कारण किताबों की कमी बताकर दाम ज्यादा भी वसूले जाने की सूचना मिली है।
बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने की चेष्टा में संपन्न वर्ग के पालक इस खर्च को वहन भी कर रहे हैं। लेकिन हम बात कर रहें हे ग्रामीण अंचल की यहां अधिकांश पालकों की शिकायत है कि कक्षा 1 से 8 तक में छत्तीसगढ़ की पुस्तकों के अलावा अन्य पूस्तकों की सूची स्कूल प्रबंधन थमा देता है। इनका कोई खास उपयोग नहीं रहता है। इससे छोटी-छोटी कक्षाओं की सभी किताबें ही 1500 रुपए तक में मिल रही है। इसके अलावा स्कूलों में एक माह का औसतन शैक्षणिक शुल्क 800-1700 रुपए प्रति बच्चे के उपर खर्च आ रहा है। फिर किताबें, कॉपी, पेन, स्कूल ड्रेस, जूते सहित अन्य सुविधाओं का भार अलग से है।

षिक्षा की बेहतरी के लिए केंद्र की सरकार सर्व शिक्षा अभियान में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद भी गुणात्मक परिवर्तन कर पाने में नाकाम है। जिसके कारण से   सारंगढ़ विकासखंड के कई विद्यालय आज भी भवन विहिन व मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। क्षेत्र के ग्राम पिण्डरी, दूखुपाट में प्राथमीक विद्यालय भवन निर्माण के लिये 3.10 लाख रू. की राशि स्वीकृत है जिसकी प्रथम किस्त में भवन अधुरा बऩा है। और निर्माण कार्य काफी दिनों से बंद है इस संबंध में सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न्युजपत्रिका ने विद्यालय के प्रधानपाठक से मामले की पुछ परख की तब पता चला कि मामला ब्लाक स्तर के उपयंत्रियों की मनमानी का है।
प्रधानपाठक ने बताया कि द्वितिय किस्त निकालने के लिये इंजिनियर के पास एम.बी. व फाईल जमा किया गया है। परंतु उनके तरफ से कोई प्रत्युत्तर नही मिला है। जैसे राशि आयेगी काम षुरू हो जायेगा।
विदित हो कि यह गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य है, ऐतिहासिक जमाने की अनेक रहस्यों को समेंटे हुये आज भी विकास की बाट जोह रहा है यहां के जागरूक समाजसेवी पूर्व उपसरपंच रामदेव कुर्रे ने कहा कि यह तो षासकिय कार्य में लापरवाही है अब तक तो भवन तैयार हो जाना था, जनपद स्तर के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के फलस्वरूप विद्यार्थी आज भी खाई और तालाब के बिच बने मंगल भवन में फर्श या फटी टाटपट्टियों पर बैठकर षिक्षा अध्ययन को मजबूर हैं।
कई विद्यालय तो ऐसे हैं जहां भूमि समतली करण नही किया गया है इसके अभाव में बारीष होने पर छात्रों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय के बाहर यहाँ- वहाँ कचरे का ढेर बिखरे पड़े रहते हैं। इस कारण बच्चों में संक्रामक बिमारियां होने की संभावना बनी हुई है।

हर दिल में हो समरस्ता की भावना: दीनानाथ


 सारंगढ़। 
रामदेव कुर्रे, आशाराम निराला,  दीनानाथ खुंटे 
हिन्दू संस्कृति विष्व की आदि संस्कृति है। इसका लाखों वर्शो का इतिहास है। भगवान श्री रामचंद्र जी युग पुरूश है, उनके नाम केे स्मरण से ही मानव जन्म का उद्धार हो जाता है। भगवान राम का जीवन मर्यादा का अद्वितिय उदाहरण है। वे जीवन मूल्यों को उच्च आदर्ष पर स्थापित करने वाले है। यह बात मधुबन ग्राम में सोमवार से चल रहे अखंड रामायण कथा के समापन अवसर पर धर्म जागरण के पं. भूशणदास वैश्णव ने कही। उन्होंने सभी समाज के लोगो को भाईचारा बनाकर रहने की सलाह दी।
रामायण कथा के समापन अवसर पर धर्म जागरण समन्वय विभाग के खण्ड संयोजक दीनानाथ खुंटे ने कहा कि ईसाई या मुष्लिम धर्म में मतांतरित हो जाने से परस्पर संबंध खत्म हो जाते है। खान पान में भी अंतर हो जाता है। उच नीच का व जातिय द्वेष बढ जाता है। जिसके फलस्वरूप समाज मंे अषांति का वातावरण हर समय बना रहता है। इसलिये समाज में समरस्ता लाना बेहद जरूरी है। मानव-मानव एक साथ मिलके मैत्री पूर्वक रहें इससे बड़ा कोई धर्म नही है। भेदभाव को त्याग कर हर दिल में समरस्ता की भावना जगे इसके लिये प्रयास करना चाहिये। कोई भी सतनामी मतांतरित न हो इसके लिये समाज में जागरण का कार्य निरंतर चलते रहना चाहिये।
सतनाम परियोजना के खण्ड प्रमुख रामदेव कुर्रे ने समाज में रामायण के प्रति प्रेम को बताया कि छत्तीसगढ़ के इस पावन माटी में ही भगवान राम का ज्यादातर वनवास काल गुजरा है हमारी संस्कृति आदिकालिन है। इसका प्रमाण भी मिलने लगे है। यहा पर रामनामी समुदाय के लोगों का निवास है। वे पूरी तरह से रामायणी संत हैं। समाज में एकरूपता लाने व धर्मांतरण रोकने के लिये परियोजना के माध्यम से इस प्रकार के आयोजन करते रहेंगे। जिससे समाज संगठित होकर एकता के मार्ग पर चले।


राम कथा का आयोजन रेमराय रात्रे ठिकादार के निवास पर आयोजित था। गांव में रास्ता खराब होने के कारण प्रातिय कार्यकर्ता मनोज लहरे उपस्थित नही हो सके उन्होंने अपने स्थान पर खण्ड के परियोजना प्रमुख को भेजा उनके साथ रामनामी आश्रम बड़े हरदी के संत बालकदास जी महाराज भी कार्यक्रम में षामील हुये।


तीन द्विवसीय रामकथा में पं. टीकाराम रात्रे, गणेषराम सोनवानी छूहीपाली, आषाराम निराला खुरघटी, पूरनदास मानिकपुरी, समारूदास बड़े हरदी, लालकुमार सिदार भेड़वन, रामाधार जोल्हे सहित अनेक मानस प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर इसके सफल आयोजन के लिये जागरण विभाग को गांव के मिलापराम, खोलबहरा, रोमलाल रात्रे सहित उपस्थित अतिथियों को आभार प्रेशित किया ।