तहसील क्षेत्र के भिखमपुरा, छर्रा, हिर्री व गोड़म इलाके में शाम ढलते ही घरों में शराब की भट्टियां धंधकने लगती हैं। देखने को मिला है कि इस काम को महिलाएं भी अंजाम देने में पीछे नहीं रहती हैं। पुरुषों की अपेक्षा इन्हें पुलिस का भी डर कम रहता है। गांव में पुलिस की आने की सूचना इन कारोबारियों को पहले ही हो जाती है। हालात यह है कि घर की रसोई में ही शराब बनाई जाती है। पुलिस के पहुंचने पर ये महिलाएं बच्चों को आगे कर भाग खडी होती हैं। क्षेत्र के गांव भेड़वन, खुड़ूभाठा, महकमपुर, हरदी, हिर्री, खुर्सी, गोड़म, भिखमपुरा, खैरा बड़े, छर्रा, छतौना आदि गांवों में कच्ची शराब बनाने का कारोबार गृह उद्योग की भांति सालों से फूलफूल रहा है। शिकायत के बावजूद आबकारी महकमे व स्थानीय पुलिस कार्रवाई से कतराती है। कई मर्तबा छापे पड़े और कईयों ने जेल की हवा भी खा ली पर षराब बनाना नही छोड़े कुछ लोग तो इसे अपना व्यवसाय मान कर चलते है। जिससे अब क्षेत्र की महिलाए आक्रोशित है और इनके खिलाफ मुहिम चलाने की योजना बना रही है। इस संबंध में हमारे संवाददाता
इस अवसर पर सारंगढ़ जनपद पंचायत के पूर्व सदस्य श्रीमति फुलनदेवी कुर्रे, सरपंच श्रीमती लक्ष्मीन कुर्रे, पूनीबाई, चमेली खुटे, राधाबाई, सुनिता, बुधियारिन एवं सुनती चैहान सहित बड़ी संख्या में महिलाये उपस्थित रही।
क्षेत्र के सरपंचों ने कहा_____________________________

श्रीमति लक्ष्मीन कुर्रे, सरपंच भिखमपुरा
2. षराब बनाने की जानकारी तो नही है लेकिन फिर भी लोग नजाने कहां कहा से पीकर आते है और हुड़दंग मचाते है इन पर कार्यवाई होने चाहिये।
श्रीमति रेवती पटेल, सरपंच हरदी
3. षराब बंद कराने के लिये गांव-गांव में महिलाओं को संगठित होेकर आंदोलन करने की जरूरत है, इससे बदलाव जरूर होगा। परदेषी बंजारे, सरपंच कौवाताल
4. हमारे पंचायत में षराब बनाना व बेचना मना है। षिकायत मिलने पर गांव में सामूहिक रूप से जुर्माना लिया जाता है अन्यथा समाज से बहिस्कृत करने का भी प्रावधान है इससे गांव में ऐसी हालत नही है।
सुरंजन बंजारे, सरपंच ग्वालिनडीह
5. गांव मे समिति बना है वे षराब, जुआ सटटा व अन्य आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण करते है। पंचायत में ऐसी मामला अबतक नही आया है।
श्रीमति ललिता महेष, सरपंच पिण्डरी
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